भोजन का असाध्य रोगों पर प्रभाव

डॉ. जगदीप सिहाग

परम श्रद्धेय साथियों,
मैं अक्सर एक प्रश्न पूछता हूँ—क्या कोई व्यक्ति भोजन के अभाव में अधिक बीमार होता है या अनुचित भोजन के कारण?

मेरे 27 वर्षों के अनुभव का निष्कर्ष है कि आज अधिकांश लोग भोजन की कमी से नहीं, बल्कि भोजन के प्रति अज्ञानता और असंतुलन के कारण अधिक पीड़ित हैं। शरीर का निर्माण भी भोजन से होता है और शरीर का विनाश भी गलत भोजन से हो सकता है।

प्रकृति ने भोजन को औषधि के रूप में बनाया है, लेकिन जब वही भोजन आवश्यकता से अधिक, प्रकृति के विरुद्ध या पाचन शक्ति से अधिक मात्रा में लिया जाता है, तब वह शरीर पर बोझ बन जाता है।

यह बोझ धीरे-धीरे पाचन तंत्र को कमजोर करता है, उत्सर्जन तंत्र को बाधित करता है और शरीर में ऐसे अवरोध उत्पन्न करता है जो आगे चलकर अनेक जटिल रोगों का कारण बन सकते हैं।

मैंने अपने कार्यकाल में देखा है कि अनेक रोगियों की समस्याओं का मूल कारण कोई दवा का अभाव नहीं था, बल्कि अनुचित भोजन था। शरीर को जितनी आवश्यकता थी उससे अधिक भोजन, बार-बार भोजन, अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन, असमय भोजन तथा प्रकृति और ऋतु के विरुद्ध भोजन ने उनके स्वास्थ्य को प्रभावित किया।

जब व्यक्ति अपनी प्रकृति, आयु, श्रम, पाचन शक्ति और रोग की स्थिति के अनुसार भोजन ग्रहण करता है, तब शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। ऐसी स्थिति में शरीर के प्राकृतिक सुधार और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करती है।

मैं यह नहीं कहता कि कोई एक विशेष भोजन सभी रोगों का समाधान है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति अलग है, इसलिए भोजन की आवश्यकता भी अलग होगी। जो भोजन एक व्यक्ति के लिए अमृत है, वही दूसरे व्यक्ति के लिए समस्या का कारण बन सकता है। इसलिए भोजन का चयन व्यक्ति की प्रकृति और स्थिति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल प्रचार और प्रचलन के आधार पर।

शोध संदर्भ

मेरा पीएचडी शोध विषय "प्राचीन वाङ्मय में असाध्य रोगों पर श्रम, संयम, भोजन, शोधन एवं सामाजिक परिवेश का प्रभाव" रहा है। अध्ययन और अनुभव दोनों यही बताते हैं कि उचित भोजन शरीर को निर्माण की दिशा में ले जाता है, जबकि अनुचित भोजन शरीर को विकारों की दिशा में धकेलता है।

साथियों, यदि हम अपने भोजन को सुधार लें तो स्वास्थ्य की दिशा में आधी यात्रा वहीं पूरी हो जाती है। क्योंकि शरीर उसी से बनता है जो हम खाते हैं, और वही शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचता है।

आइए, भोजन को स्वाद का विषय मात्र न बनाकर स्वास्थ्य का विषय बनाएं और प्रकृति के अनुरूप भोजन करके शरीर को स्वस्थ रहने का अवसर दें।

याद रखिए—
"भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, यह स्वास्थ्य और रोग दोनों का आधार बन सकता है।"